सूरह अल-अंबिया

لَا يُسْـَٔلُ عَمَّا يَفْعَلُ وَهُمْ يُسْـَٔلُونَ

Lā yus'alu ‘ammā yaf‘alu wa hum yus'alūn(a).

जो कुछ वह करता है उससे उसकी कोई पूछ नहीं हो सकती, किन्तु इनसे पूछ होगी

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