सूरह अल-अंबिया

وَلُوطًا ءَاتَيْنَـٰهُ حُكْمًا وَعِلْمًا وَنَجَّيْنَـٰهُ مِنَ ٱلْقَرْيَةِ ٱلَّتِى كَانَت تَّعْمَلُ ٱلْخَبَـٰٓئِثَ ۗ إِنَّهُمْ كَانُوا۟ قَوْمَ سَوْءٍ فَـٰسِقِينَ

Wa lūṭan ātaināhu ḥumkaw wa ‘ilmaw wa najjaināhu minal-qaryatil-latī kānat ta‘malul-khabā'iṡ(a), innahum kānū qauma sau'in fāsiqīn(a).

और रहा लूत तो उसे हमने निर्णय-शक्ति और ज्ञान प्रदान किया और उसे उस बस्ती से छुटकारा दिया जो गन्दे कर्म करती थी। वास्तव में वह बहुत ही बुरी और अवज्ञाकारी क़ौम थी

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