सूरह अल-अंबिया

مَا يَأْتِيهِم مِّن ذِكْرٍ مِّن رَّبِّهِم مُّحْدَثٍ إِلَّا ٱسْتَمَعُوهُ وَهُمْ يَلْعَبُونَ

Mā ya'tīhim min żikrim mir rabbihim muḥdaṡin illastama‘ūhu wa hum yal‘abūn(a).

उनके पास जो ताज़ा अनुस्मृति भी उनके रब की ओर से आती है, उसे वे हँसी-खेल करते हुए ही सुनते है

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