सूरह अश-शुअरा

إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ

Inna fī żālika la'āyah(tan), wa mā kāna akṡaruhum mu'minīn(a).

निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकरतर माननेवाले नहीं

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