सूरह अश-शुअरा

وَمَا يَنۢبَغِى لَهُمْ وَمَا يَسْتَطِيعُونَ

Wa mā yambagī lahum wa mā yastaṭī‘ūn(a).

न यह उन्हें फबता ही है और न ये उनके बस का ही है

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