सूरह अश-शुअरा

فَقَرَأَهُۥ عَلَيْهِم مَّا كَانُوا۟ بِهِۦ مُؤْمِنِينَ

Fa qara'ahū ‘alaihim mā kānū bihī mu'minīn(a).

और वह इसे उन्हें पढ़कर सुनाता तब भी वे इसे माननेवाले न होते

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