सूरह अश-शुअरा

لَا يُؤْمِنُونَ بِهِۦ حَتَّىٰ يَرَوُا۟ ٱلْعَذَابَ ٱلْأَلِيمَ

Lā yu'minūna bihī ḥattā yarawul-‘ażābal-alīm(a).

वे इसपर ईमान लाने को नहीं, जब तक कि दुखद यातना न देख लें

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