सूरह अश-शुअरा

أَلَمْ تَرَ أَنَّهُمْ فِى كُلِّ وَادٍ يَهِيمُونَ

Alam tara annahum fī kulli wādiy yahīmūn(a).

क्या तुमने देखा नहीं कि वे हर घाटी में बहके फिरते हैं,

📝 टिप्पणी
543) इस आयत का अर्थ यह है कि कुछ कवि केवल शब्दों के हेर-फेर (शब्द-क्रीड़ा) में लगे रहते हैं, उनका कोई अच्छा उद्देश्य नहीं होता और न ही उनका कोई दृढ़ सिद्धांत होता है।

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