सूरह अश-शुअरा

لَعَلَّكَ بَـٰخِعٌ نَّفْسَكَ أَلَّا يَكُونُوا۟ مُؤْمِنِينَ

La‘allaka bākhi‘un nafsaka allā yakūnū mu'minīn(a).

शायद इसपर कि वे ईमान नहीं लाते, तुम अपने प्राण ही खो बैठोगे

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