सूरह अल-अनआम
قَدْ جَآءَكُم بَصَآئِرُ مِن رَّبِّكُمْ ۖ فَمَنْ أَبْصَرَ فَلِنَفْسِهِۦ ۖ وَمَنْ عَمِىَ فَعَلَيْهَا ۚ وَمَآ أَنَا۠ عَلَيْكُم بِحَفِيظٍ
Qad jā'akum baṣā'iru mir rabbikum, faman abṣara fa linafsih(ī), wa man ‘amiya fa ‘alaihā, wa mā ana ‘alaikum biḥafīẓ(in).
तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से आँख खोल देनेवाले प्रमाण आ चुके है; तो जिस किसी ने देखा, अपना ही भला किया और जो अंधा बना रहा, तो वह अपने ही को हानि पहुँचाएगा। और मैं तुमपर कोई नियुक्त रखवाला नहीं हूँ
📝 टिप्पणी
256) जो कोई सत्य को जान लेता है, नेक काम करता है और मार्गदर्शन प्राप्त कर लेता है, उसने वास्तव में सुख और सफलता के सर्वोच्च शिखर को पा लिया है।