सूरह अल-अनआम

وَلَا تَأْكُلُوا۟ مِمَّا لَمْ يُذْكَرِ ٱسْمُ ٱللَّهِ عَلَيْهِ وَإِنَّهُۥ لَفِسْقٌ ۗ وَإِنَّ ٱلشَّيَـٰطِينَ لَيُوحُونَ إِلَىٰٓ أَوْلِيَآئِهِمْ لِيُجَـٰدِلُوكُمْ ۖ وَإِنْ أَطَعْتُمُوهُمْ إِنَّكُمْ لَمُشْرِكُونَ

Wa lā ta'kulū mimmā lam yużkarismullāhi ‘alaihi wa innahū lafisq(un), wa innasy-syayāṭīna layūḥūna ilā auliyā'ihim liyujādilūkum, wa in aṭa‘tumūhum innakum lamusyrikūn(a).

और उसे न खाओं जिसपर अल्लाह का नाम न लिया गया हो। निश्चय ही वह तो आज्ञा का उल्लंघन है। शैतान तो अपने मित्रों के दिलों में डालते है कि वे तुमसे झगड़े। यदि तुमने उनकी बात मान ली तो निश्चय ही तुम बहुदेववादी होगे

📝 टिप्पणी
258) सूरा आलि इमरान/3: 28 का पाद-टिप्पणी (फुटनोट) देखें।

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