सूरह अल-अनआम

وَلَقَدْ أَرْسَلْنَآ إِلَىٰٓ أُمَمٍ مِّن قَبْلِكَ فَأَخَذْنَـٰهُم بِٱلْبَأْسَآءِ وَٱلضَّرَّآءِ لَعَلَّهُمْ يَتَضَرَّعُونَ

Wa laqad arsalnā ilā umamim min qablika fa akhażnāhum bil-ba'sā'i waḍ-ḍarrā'i la‘allahum yataḍarra‘ūn(a).

तुमसे पहले कितने ही समुदायों की ओर हमने रसूल भेजे कि उन्हें तंगियों और मुसीबतों में डाला, ताकि वे विनम्र हों

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