सूरह अल-अनआम
وَعَلَى ٱلَّذِينَ هَادُوا۟ حَرَّمْنَا كُلَّ ذِى ظُفُرٍ ۖ وَمِنَ ٱلْبَقَرِ وَٱلْغَنَمِ حَرَّمْنَا عَلَيْهِمْ شُحُومَهُمَآ إِلَّا مَا حَمَلَتْ ظُهُورُهُمَآ أَوِ ٱلْحَوَايَآ أَوْ مَا ٱخْتَلَطَ بِعَظْمٍ ۚ ذَٰلِكَ جَزَيْنَـٰهُم بِبَغْيِهِمْ ۖ وَإِنَّا لَصَـٰدِقُونَ
Wa ‘alal-lażīna hādū ḥarramnā kulla żī ẓufur(in), wa minal-baqari wal-ganami ḥarramnā ‘alaihim syuḥūmahumā illā mā ḥamalat ẓuhūruhumā awil-ḥawāyā au makhtalaṭa bi‘aẓm(in), żālika jazaināhum bibagyihim, wa innā laṣādiqūn(a).
और उन लोगों के लिए जो यहूदी हुए हमने नाख़ूनवाला जानवर हराम किया और गाय और बकरी में से इन दोनों की चरबियाँ उनके लिए हराम कर दी थीं, सिवाय उस (चर्बी) के जो उन दोनों की पीठों या आँखों से लगी हुई या हड़्डी से मिली हुई हो। यह बात ध्यान में रखो। हमने उन्हें उनकी सरकशी का बदला दिया था और निश्चय ही हम सच्चे है
📝 टिप्पणी
265) यहाँ "नाखून वाले जानवरों" (ज़ी ज़ुफ़ुर) से तात्पर्य उन जानवरों से है जिनकी उँगलियाँ आपस में अलग-अलग नहीं होतीं, जैसे ऊँट, बत्तख़ और हंस। कुछ मुफ़स्सिरों (व्याख्याताओं) ने इसका अर्थ एक खुर वाले जानवर लिया है, जैसे घोड़ा और गधा।