सूरह अल-अनआम

وَقَالُوا۟ لَوْلَآ أُنزِلَ عَلَيْهِ مَلَكٌ ۖ وَلَوْ أَنزَلْنَا مَلَكًا لَّقُضِىَ ٱلْأَمْرُ ثُمَّ لَا يُنظَرُونَ

Wa qālū lau lā unzila ‘alaihi malak(un), wa lau anzalnā malakal laquḍiyal-amru ṡumma lā yunẓarūn(a).

उनका तो कहना है, "इस (नबी) पर कोई फ़रिश्ता (खुले रूप में) क्यों नहीं उतारा गया?" हालाँकि यदि हम फ़रिश्ता उतारते तो फ़ैसला हो चुका होता। फिर उन्हें कोई मुहल्लत न मिलती

📝 टिप्पणी
237) इस कथन का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) एक नबी हैं।

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