सूरह अल-अनआम

قُل لِّمَن مَّا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۖ قُل لِّلَّهِ ۚ كَتَبَ عَلَىٰ نَفْسِهِ ٱلرَّحْمَةَ ۚ لَيَجْمَعَنَّكُمْ إِلَىٰ يَوْمِ ٱلْقِيَـٰمَةِ لَا رَيْبَ فِيهِ ۚ ٱلَّذِينَ خَسِرُوٓا۟ أَنفُسَهُمْ فَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ

Qul limam mā fis-samāwāti wal-arḍ(i), qul lillāh(i), kataba ‘alā nafsihir-raḥmah(ta), layajma‘annakum ilā yaumil-qiyāmati lā raiba fīh(i), al-lażīna khasirū anfusahum fahum lā yu'minūn(a).

कहो, "आकाशों और धरती में जो कुछ है किसका है?" कह दो, "अल्लाह ही का है।" उसने दयालुता को अपने ऊपर अनिवार्य कर दिया है। निश्चय ही वह तुम्हें क़ियामत के दिन इकट्ठा करेगा, इसमें कोई सन्देह नहीं है। जिन लोगों ने अपने-आपको घाटे में डाला है, वही है जो ईमान नहीं लाते

📝 टिप्पणी
239) अल्लाह (सुब्हानहू व तआला) ने अपनी असीम कृपा के रूप में यह वादा किया है कि वह अपनी रचना (मख़लूक़) पर दया और रहमत बरसाएगा।

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