सूरह अल-अनआम

۞ لَهُمْ دَارُ ٱلسَّلَـٰمِ عِندَ رَبِّهِمْ ۖ وَهُوَ وَلِيُّهُم بِمَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ

Lahum dārus-salāmi ‘inda rabbihim wa huwa waliyyuhum bimā kānū ya‘malūn(a).

उनके लिए उनके रब के यहाँ सलामती का घर है और वह उनका संरक्षक मित्र है, उन कामों के कारण जो वे करते रहे है

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