सूरह अल-अनआम

وَكَذَٰلِكَ جَعَلْنَا فِى كُلِّ قَرْيَةٍ أَكَـٰبِرَ مُجْرِمِيهَا لِيَمْكُرُوا۟ فِيهَا ۖ وَمَا يَمْكُرُونَ إِلَّا بِأَنفُسِهِمْ وَمَا يَشْعُرُونَ

Wa każālika ja‘alnā fī kulli qaryatin akābira mujrimīhā liyamkurū fīhā, wa mā yamkurūna illā bi'anfusihim wa mā yasy‘urūn(a).

और इसी प्रकार हमने प्रत्येक बस्ती में उसके बड़े-बड़े अपराधियों को लगा दिया है कि ले वहाँ चालें चले। वे अपने ही विरुद्ध चालें चलते है, किन्तु उन्हें इसका एहसास नहीं

📝 टिप्पणी
259) कुछ मुफ़स्सिरों (व्याख्याताओं) के अनुसार, "अकाबिरा मुजरिमीहा" का अर्थ 'बड़े-बड़े अपराधी' है।

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