सूरह अल-अनआम

وَنُقَلِّبُ أَفْـِٔدَتَهُمْ وَأَبْصَـٰرَهُمْ كَمَا لَمْ يُؤْمِنُوا۟ بِهِۦٓ أَوَّلَ مَرَّةٍ وَنَذَرُهُمْ فِى طُغْيَـٰنِهِمْ يَعْمَهُونَ

Wa nuqallibu af'idatahum wa abṣārahum kamā lam yu'minū bihī awwala marratiw wa nażaruhum fī ṭugyānihim ya‘mahūn(a).

और हम उनके दिलों और निगाहों को फेर देंगे, जिस प्रकार वे पहली बार ईमान नहीं लाए थे। और हम उन्हें छोड़ देंगे कि वे अपनी सरकशी में भटकते रहें

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