सूरह अल-अनआम
فَلَمَّا جَنَّ عَلَيْهِ ٱلَّيْلُ رَءَا كَوْكَبًا ۖ قَالَ هَـٰذَا رَبِّى ۖ فَلَمَّآ أَفَلَ قَالَ لَآ أُحِبُّ ٱلْـَٔافِلِينَ
Falammā janna ‘alaihil-lailu ra'ā kaukabā(n), qāla hāżā rabbī, falammā afala qāla lā uḥibbul-āfilīn(a).
अतएवः जब रात उसपर छा गई, तो उसने एक तारा देखा। उसने कहा, "इसे मेरा रब ठहराते हो!" फिर जब वह छिप गया तो बोला, "छिप जानेवालों से मैं प्रेम नहीं करता।"
📝 टिप्पणी
251) पैगंबर इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) ने जो कुछ किया, उसे ईश्वर की खोज की उनकी यात्रा के रूप में देखने के बजाय, उनकी कौम (लोगों) में तौहीद (एकेश्वरवाद) के अक़ीदे (विश्वास) को स्थापित करने के उनके प्रयास के रूप में समझा जाना अधिक सही है।