सूरह अल-अनआम

وَكَذَٰلِكَ زَيَّنَ لِكَثِيرٍ مِّنَ ٱلْمُشْرِكِينَ قَتْلَ أَوْلَـٰدِهِمْ شُرَكَآؤُهُمْ لِيُرْدُوهُمْ وَلِيَلْبِسُوا۟ عَلَيْهِمْ دِينَهُمْ ۖ وَلَوْ شَآءَ ٱللَّهُ مَا فَعَلُوهُ ۖ فَذَرْهُمْ وَمَا يَفْتَرُونَ

Wa każālika zayyana likaṡīrim minal-musyrikīna qatla aulādihim syurakā'uhum liyurdūhum wa liyalbisū ‘alaihim dīnahum, wa lau syā'allāhu mā fa‘alūhu fa żarhum wa mā yaftarūn(a).

इसी प्रकार बहुत-से बहुदेववादियों के लिए उनके लिए साझीदारों ने उनकी अपनी सन्तान की हत्या को सुहाना बना दिया है, ताकि उन्हें विनष्ट कर दें और उनके लिए उनके धर्म को संदिग्ध बना दें। यदि अल्लाह चाहता तो वे ऐसा न करते; तो छोड़ दो उन्हें और उनके झूठ घड़ने को

📝 टिप्पणी
263) कुछ अरब पैगंबर इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) की शरीयत (नियमों) के अनुयायी थे। पैगंबर इब्राहिम को अल्लाह (सुब्हानहू व तआला) ने एक बार अपने बेटे इस्माईल की क़ुर्बानी का आदेश दिया था। बाद में, उनके कुछ धार्मिक नेताओं ने उस क़ुर्बानी के अर्थ को विकृत (धुंधला) कर दिया, जिससे उनके मन में अल्लाह के निकट होने के बहाने अपने बच्चों की हत्या को अच्छा समझने की भावना पैदा हो गई। जबकि इसके पीछे का असली कारण ग़रीबी का डर और कलंक (अपमान) का भय था।

सभी आयत 165 आयत
आज ही पढ़ना शुरू करें

क़ुरआन पढ़ना अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। क़ुरआन टुडे आपको विकर्षणों के बिना पढ़ना जारी रखने में मदद करता है, एक सरल, तेज़, निजी और आरामदायक अनुभव के साथ।