सूरह अल-अनआम
وَلَقَدْ كُذِّبَتْ رُسُلٌ مِّن قَبْلِكَ فَصَبَرُوا۟ عَلَىٰ مَا كُذِّبُوا۟ وَأُوذُوا۟ حَتَّىٰٓ أَتَىٰهُمْ نَصْرُنَا ۚ وَلَا مُبَدِّلَ لِكَلِمَـٰتِ ٱللَّهِ ۚ وَلَقَدْ جَآءَكَ مِن نَّبَإِى۟ ٱلْمُرْسَلِينَ
Wa laqad kużżibat rusulum min qablika fa ṣabarū ‘alā mā kużżibū wa ūżū ḥattā atāhum naṣrunā, wa lā mubaddila likalimātillāh(i), wa laqad jā'aka min naba'il-mursalīn(a).
तुमसे पहले भी बहुत-से रसूल झुठलाए जा चुके है, तो वे अपने झुठलाए जाने और कष्ट पहुँचाए जाने पर धैर्य से काम लेते रहे, यहाँ तक कि उन्हें हमारी सहायता पहुँच गई। कोई नहीं जो अल्लाह की बातों को बदल सके। तुम्हारे पास तो रसूलों की कुछ ख़बरें पहुँच ही चुकी है
📝 टिप्पणी
240) "कलिमात अल्लाह" (अल्लाह के शब्दों) से तात्पर्य उनके उन आदेशों और फैसलों से है जो लौह-ए-महफ़ूज़ (सुरक्षित पट्टिका) में लिखे जा चुके हैं। इन फैसलों में से एक यह भी है कि झुठलाने वाले निश्चित रूप से नष्ट हो जाएंगे और जो ईमान लाए (विश्वास किया) वे विजयी होंगे।