सूरह अल-अराफ़

فَإِذَا جَآءَتْهُمُ ٱلْحَسَنَةُ قَالُوا۟ لَنَا هَـٰذِهِۦ ۖ وَإِن تُصِبْهُمْ سَيِّئَةٌ يَطَّيَّرُوا۟ بِمُوسَىٰ وَمَن مَّعَهُۥٓ ۗ أَلَآ إِنَّمَا طَـٰٓئِرُهُمْ عِندَ ٱللَّهِ وَلَـٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ

Fa iżā jā'athumul-ḥasanatu qālū lanā hāżihī, wa in tuṣibhum sayyi'atuy yaṭṭayyarū bimūsā wa mam ma‘ah(ū), alā innamā ṭā'iruhum ‘indallāhi wa lākinna aksṡarahum lā ya‘lamūn(a).

फिर जब उन्हें अच्छी हालत पेश आती है तो कहते है, "यह तो है ही हमारे लिए।" और उन्हें बुरी हालत पेश आए तो वे उसे मूसा और उसके साथियों की नहूसत (अशकुन) ठहराएँ। सुन लो, उसकी नहूसत तो अल्लाह ही के पास है, परन्तु उनमें से अधिकतर लोग जानते नहीं

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