सूरह अल-अराफ़

وَٱلَّذِينَ كَذَّبُوا۟ بِـَٔايَـٰتِنَا سَنَسْتَدْرِجُهُم مِّنْ حَيْثُ لَا يَعْلَمُونَ

Wal-lażīna każżabū bi'āyātinā sanastadrijuhum min ḥaiṡu lā ya‘lamūn(a).

रहे वे लोग जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया, हम उन्हें क्रमशः तबाही की ओर ले जाएँगे, ऐसे तरीक़े से जिसे वे जानते नहीं

📝 टिप्पणी
297) इस ढील देने (इस्तिदराज) का उदाहरण उस व्यक्ति जैसा है जो पाप तो करता है लेकिन उसका जीवन प्रकट रूप से अधिक सफल दिखाई देता है, जिसके कारण वह पाप करने में और अधिक साहसी हो जाता है। वह इस बात से अनजान है कि उसका यह कृत्य वास्तव में उसे विनाश की ओर ले जा रहा है।

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