सूरह अल-अराफ़

وَلَمَّا جَآءَ مُوسَىٰ لِمِيقَـٰتِنَا وَكَلَّمَهُۥ رَبُّهُۥ قَالَ رَبِّ أَرِنِىٓ أَنظُرْ إِلَيْكَ ۚ قَالَ لَن تَرَىٰنِى وَلَـٰكِنِ ٱنظُرْ إِلَى ٱلْجَبَلِ فَإِنِ ٱسْتَقَرَّ مَكَانَهُۥ فَسَوْفَ تَرَىٰنِى ۚ فَلَمَّا تَجَلَّىٰ رَبُّهُۥ لِلْجَبَلِ جَعَلَهُۥ دَكًّا وَخَرَّ مُوسَىٰ صَعِقًا ۚ فَلَمَّآ أَفَاقَ قَالَ سُبْحَـٰنَكَ تُبْتُ إِلَيْكَ وَأَنَا۠ أَوَّلُ ٱلْمُؤْمِنِينَ

Wa lammā jā'a mūsā limīqātinā wa kallamahū rabbuh(ū), qāla rabbi arinī anẓur ilaik(a), qāla lan tarānī wa lākininẓur ilal-jabali fa inistaqarra makānahū fa saufa tarānī, falammā tajallā rabbuhū lil-jabali ja‘alahū dakkaw wa kharra mūsā ṣa‘iqā(n), falammā afāqa qāla subḥānaka tubtu ilaika wa ana awwalul-mu'minīn(a).

अब मूसा हमारे निश्चित किए हुए समय पर पहुँचा और उसके रब ने उससे बातें की, तो वह करने लगा, "मेरे रब! मुझे देखने की शक्ति प्रदान कर कि मैं तुझे देखूँ।" कहा, "तू मुझे कदापि न देख सकेगा। हाँ, पहाड़ की ओर देख। यदि वह अपने स्थान पर स्थिर पर स्थिर रह जाए तो फिर तू मुझे देख लेगा।" अतएव जब उसका रब पहाड़ पर प्रकट हुआ तो उसे चकनाचूर कर दिया और मूसा मूर्छित होकर गिर पड़ा। फिर जब होश में आया तो कहा, "महिमा है तेरी! मैं तेरे समझ तौबा करता हूँ और सबसे पहला ईमान लानेवाला मैं हूँ।"

📝 टिप्पणी
281) कुछ मुफ़स्सिरों (व्याख्याताओं) के अनुसार, जो प्रकट (तजल्ली) हुआ था वह अल्लाह (सुब्हानहू व तआला) की महानता और शक्ति थी। जबकि अन्य व्याख्याकारों ने इसका अर्थ यह निकाला है कि वह उनका नूर (प्रकाश) था। बहरहाल, अल्लाह का प्रकट होना किसी जीव या सृष्टि के प्रकट होने जैसा नहीं है। अल्लाह की तजल्ली अनिवार्य रूप से उनके अपने गुणों (सिफ़ात) के अनुकूल होती है, जिसे मानव बुद्धि या विचारों से मापा नहीं जा सकता।

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