सूरह अल-अराफ़

مَن يُضْلِلِ ٱللَّهُ فَلَا هَادِىَ لَهُۥ ۚ وَيَذَرُهُمْ فِى طُغْيَـٰنِهِمْ يَعْمَهُونَ

May yuḍlilillāhu falā hādiya lah(ū), wa yażaruhum fī ṭugyānihim ya‘mahūn(a).

जिसे अल्लाह मार्ग से वंचित रखे उसके लिए कोई मार्गदर्शक नहीं। वह तो तो उन्हें उनकी सरकशी ही में भटकता हुआ छोड़ रहा है

📝 टिप्पणी
298) सूरा अल-बक़रह/2: 26 का पाद-टिप्पणी (फुटनोट) देखें।

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