सूरह अल-अराफ़
أَلَهُمْ أَرْجُلٌ يَمْشُونَ بِهَآ ۖ أَمْ لَهُمْ أَيْدٍ يَبْطِشُونَ بِهَآ ۖ أَمْ لَهُمْ أَعْيُنٌ يُبْصِرُونَ بِهَآ ۖ أَمْ لَهُمْ ءَاذَانٌ يَسْمَعُونَ بِهَا ۗ قُلِ ٱدْعُوا۟ شُرَكَآءَكُمْ ثُمَّ كِيدُونِ فَلَا تُنظِرُونِ
Alahum arjuluy yamsyūna bihā am lahum aidiy yabṭisyūna bihā am lahum a‘yunuy yubṣirūna bihā am lahum āżānuy yasma‘ūna bihā, qulid‘ū syurakā'akum ṡumma kīdūni falā tunẓirūn(i).
क्या उनके पाँव हैं जिनसे वे चलते हों या उनके हाथ हैं जिनसे वे पकड़ते हों या उनके पास आँखें हीं जिनसे वे देखते हों या उनके कान हैं जिनसे वे सुनते हों? कहों, "तुम अपने ठहराए हु सहभागियों को बुला लो, फिर मेरे विरुद्ध चालें न चलो, इस प्रकार कि मुझे मुहलत न दो
📝 टिप्पणी
301) यहाँ 'यबतिशून' (yabṭisyūn) शब्द का अर्थ 'कठोर' या 'उग्र' है, जिसका तात्पर्य 'थप्पड़ मारना', 'नष्ट करना', 'हिंसा से प्रहार करना' और इसी तरह के अन्य अर्थों से है।