सूरह अल-अराफ़

فَأَرْسَلْنَا عَلَيْهِمُ ٱلطُّوفَانَ وَٱلْجَرَادَ وَٱلْقُمَّلَ وَٱلضَّفَادِعَ وَٱلدَّمَ ءَايَـٰتٍ مُّفَصَّلَـٰتٍ فَٱسْتَكْبَرُوا۟ وَكَانُوا۟ قَوْمًا مُّجْرِمِينَ

Fa arsalnā ‘alaihimuṭ-ṭūfāna wal-jarāda wal-qummala waḍ-ḍafādi‘a wad-dama āyātim mufaṣṣalāt(in), fastakbarū wa kānū qaumam mujrimīn(a).

अन्ततः हमने उनपर तूफ़ान और टिड्डियों और छोटे कीड़े और मेंढक और रक्त, कितनी ही निशानियाँ अलग-अलग भेजी, किन्तु वे घमंड ही करते रहे। वे थे ही अपराधी लोग

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