सूरह अल-अराफ़

وَجَـٰوَزْنَا بِبَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ ٱلْبَحْرَ فَأَتَوْا۟ عَلَىٰ قَوْمٍ يَعْكُفُونَ عَلَىٰٓ أَصْنَامٍ لَّهُمْ ۚ قَالُوا۟ يَـٰمُوسَى ٱجْعَل لَّنَآ إِلَـٰهًا كَمَا لَهُمْ ءَالِهَةٌ ۚ قَالَ إِنَّكُمْ قَوْمٌ تَجْهَلُونَ

Wa jāwaznā bibanī isrā'īlal-baḥra fa atau ‘alā qaumiy ya‘kufūna ‘alā aṣnāmil lahum, qālū yā mūsaj‘al lanā ilāhan kamā lahum ālihah(tun), qāla innakum qaumun tajhalūn(a).

और इसराईल की सन्तान को हमने सागर से पार करा दिया, फिर वे ऐसे लोगों को पास पहुँचे जो अपनी कुछ मूर्तियों से लगे बैठे थे। कहने लगे, "ऐ मूसा! हमारे लिए भी कोई ऐसा उपास्य ठहरा दे, जैसे इनके उपास्य है।" उसने कहा, "निश्चय ही तुम बड़े ही अज्ञानी लोग हो

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