सूरह अल-अराफ़

وَإِمَّا يَنزَغَنَّكَ مِنَ ٱلشَّيْطَـٰنِ نَزْغٌ فَٱسْتَعِذْ بِٱللَّهِ ۚ إِنَّهُۥ سَمِيعٌ عَلِيمٌ

Wa immā yanzagannaka minasy-syaiṭāni nazgun fasta‘iż billāh(i), innahū samī‘un ‘alīm(un).

और यदि शैतान तुम्हें उकसाए तो अल्लाह की शरण माँगो। निश्चय ही, वह सब कुछ सुनता जानता है

📝 टिप्पणी
302) "अऊज़ु बिल्लाहि मिनश-शैतानिर-रजीम" (Aʻūzu billāhi minash-shaiṭānir-rajīm) पढ़कर (अल्लाह की) शरण लेना।

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