सूरह अल-अराफ़
وَلِلَّهِ ٱلْأَسْمَآءُ ٱلْحُسْنَىٰ فَٱدْعُوهُ بِهَا ۖ وَذَرُوا۟ ٱلَّذِينَ يُلْحِدُونَ فِىٓ أَسْمَـٰٓئِهِۦ ۚ سَيُجْزَوْنَ مَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ
Wa lillāhil-asmā'ul-ḥusnā fad‘ūhu bihā, wa żarul-lażīna yulḥidūna fī asmā'ih(ī), sayujzauna mā kānū ya‘malūn(a).
अच्छे नाम अल्लाह ही के है। तो तुम उन्हीं के द्वारा उसे पुकारो और उन लोगों को छोड़ो जो उसके नामों के सम्बन्ध में कुटिलता ग्रहण करते है। जो कुछ वे करते है, उसका बदला वे पाकर रहेंगे
📝 टिप्पणी
296) उन लोगों की परवाह न करें जो अल्लाह (सुब्हानहू व तआला) की इबादत ऐसे नामों से करते हैं जो उनके महिमामयी गुणों (सिफ़ात) के अनुकूल नहीं हैं, या जो उनके अस्मा-उल-हुस्ना (पवित्र सुंदर नामों) का उपयोग अल्लाह के नाम को अपवित्र करने के इरादे से करते हैं, अथवा अस्मा-उल-हुस्ना का प्रयोग अल्लाह के अलावा दूसरों के नामों के लिए करते हैं।