सूरह अल-अराफ़
أَوْ تَقُولُوٓا۟ إِنَّمَآ أَشْرَكَ ءَابَآؤُنَا مِن قَبْلُ وَكُنَّا ذُرِّيَّةً مِّنۢ بَعْدِهِمْ ۖ أَفَتُهْلِكُنَا بِمَا فَعَلَ ٱلْمُبْطِلُونَ
Au taqūlū innamā asyraka ābā'unā min qablu wa kunnā żurriyyatam mim ba‘dihim, afatuhlikunā bimā fa‘alal-mubṭilūn(a).
या कहो कि "(अल्लाह के साथ) साझी तो पहले हमारे बाप-दादा ने किया। हम तो उसके पश्चात उनकी सन्तति में हुए है। तो क्या तू हमें उसपर विनष्ट करेगा जो कुछ मिथ्याचारियों ने किया है?"
📝 टिप्पणी
295) ताकि वे मुशरिक (मूर्तिपूजक) यह न कह सकें कि उनके पूर्वजों ने पहले अल्लाह के साथ साझीदार ठहराया था, जबकि वे खुद इस बात से पूरी तरह अनजान थे कि शिर्क (साझीदार ठहराना) करना गलत है। वे यह बहाना न बना सकें कि उन्होंने जो कुछ भी किया वह केवल अपने पूर्वजों की नकल थी, इसलिए वे सज़ा के पात्र नहीं हैं।