सूरह अस-साफ़्फ़ात

وَفَدَيْنَـٰهُ بِذِبْحٍ عَظِيمٍ

Wa fadaināhu biżibḥin ‘aẓīm(in).

और हमने उसे (बेटे को) एक बड़ी क़ुरबानी के बदले में छुड़ा लिया

📝 टिप्पणी
650) यह घटना ईद-उल-अज़हा (बकरीद) के दिन क़ुरबानी (पशु बलि) को अनिवार्य/शुरू किए जाने का आधार बनी।

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