सूरह अस-साफ़्फ़ात

وَلَوْلَا نِعْمَةُ رَبِّى لَكُنتُ مِنَ ٱلْمُحْضَرِينَ

Wa lau lā ni‘matu rabbī lakuntu minal-muḥḍarīn(a).

यदि मेरे रब की अनुकम्पा न होती तो अवश्य ही मैं भी पकड़कर हाज़िर किए गए लोगों में से होता

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