सूरह अस-साफ़्फ़ात

وَبَـٰرَكْنَا عَلَيْهِ وَعَلَىٰٓ إِسْحَـٰقَ ۚ وَمِن ذُرِّيَّتِهِمَا مُحْسِنٌ وَظَالِمٌ لِّنَفْسِهِۦ مُبِينٌ

Wa bāraknā ‘alaihi wa ‘alā isḥāq(a), wa min żurriyyatihimā muḥsinuw wa ẓālimul linafsihī mubīn(un).

और हमने उसे और इसहाक़ को बरकत दी। और उन दोनों की संतति में कोई तो उत्तमकार है और कोई अपने आप पर खुला ज़ुल्म करनेवाला

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