सूरह अस-साफ़्फ़ात

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ

Innā każālika najzil-muḥsinīn(a).

निस्संदेह हम उत्तमकारों को ऐसा बदला देते है

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