सूरह अस-साफ़्फ़ात

فَحَقَّ عَلَيْنَا قَوْلُ رَبِّنَآ ۖ إِنَّا لَذَآئِقُونَ

Fa ḥaqqa ‘alainā qaulu rabbinā, innā lażā'iqūn(a).

अन्ततः हमपर हमारे रब की बात सत्यापित होकर रही। निस्संदेह हमें (अपनी करतूत का) मजा़ चखना ही होगा

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