सूरह अस-साफ़्फ़ात

مَا لَكُمْ كَيْفَ تَحْكُمُونَ

Mā lakum, kaifa taḥkumūn(a).

तुम्हें क्या हो गया है? तुम कैसा फ़ैसला करते हो?

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