सूरह अस-साफ़्फ़ात

وَلَقَدْ نَادَىٰنَا نُوحٌ فَلَنِعْمَ ٱلْمُجِيبُونَ

Wa laqad nādānā nūḥun falani‘mal-mujībūn(a).

नूह ने हमको पुकारा था, तो हम कैसे अच्छे है निवेदन स्वीकार करनेवाले!

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