सूरह यूसुफ

قَالَ قَآئِلٌ مِّنْهُمْ لَا تَقْتُلُوا۟ يُوسُفَ وَأَلْقُوهُ فِى غَيَـٰبَتِ ٱلْجُبِّ يَلْتَقِطْهُ بَعْضُ ٱلسَّيَّارَةِ إِن كُنتُمْ فَـٰعِلِينَ

Qāla qā'ilum minhum lā taqtulū yūsufa wa alqūhu fī gayābatil-jubbi yaltaqiṭhu ba‘ḍus-sayyārati in kuntum fā‘ilīn(a).

उनमें से एक बोलनेवाला बोल पड़ा, "यूसुफ़ की हत्या न करो, यदि तुम्हें कुछ करना ही है तो उसे किसी कुएँ की तह में डाल दो। कोई राहगीर उसे उठा लेगा।"

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