सूरह यूसुफ

قَالَ مَعَاذَ ٱللَّهِ أَن نَّأْخُذَ إِلَّا مَن وَجَدْنَا مَتَـٰعَنَا عِندَهُۥٓ إِنَّآ إِذًا لَّظَـٰلِمُونَ

Qāla ma‘āżallāhi an na'khuża illā maw wajadnā matā‘anā ‘indah(ū), innā iżal laẓālimūn(a).

उसने कहा, "इस बात से अल्लाह पनाह में रखे कि जिसके पास हमने अपना माल पाया है, उसे छोड़कर हम किसी दूसरे को रखें। फिर तो हम अत्याचारी ठहगेंगे।"

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