सूरह यूसुफ

وَمَآ أَكْثَرُ ٱلنَّاسِ وَلَوْ حَرَصْتَ بِمُؤْمِنِينَ

Wa mā akṡarun-nāsi wa lau ḥaraṣta bimu'minīn(a).

किन्तु चाहे तुम कितना ही चाहो, अधिकतर लोग तो मानेंगे नहीं

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