सूरह यूसुफ

وَتَوَلَّىٰ عَنْهُمْ وَقَالَ يَـٰٓأَسَفَىٰ عَلَىٰ يُوسُفَ وَٱبْيَضَّتْ عَيْنَاهُ مِنَ ٱلْحُزْنِ فَهُوَ كَظِيمٌ

Wa tawallā ‘anhum wa qāla yā asafā ‘alā yūsufa wabyaḍḍat ‘aināhu minal-ḥuzni fa huwa kaẓīm(un).

उसने उनकी ओर से मुख फेर लिया और कहने लगा, "हाय अफ़सोस, यूसुफ़ की जुदाई पर!" और ग़म के मारे उसकी आँखें सफ़ेद पड़ गई और वह घुटा जा रहा था

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