सूरह यूसुफ

وَجَآءَتْ سَيَّارَةٌ فَأَرْسَلُوا۟ وَارِدَهُمْ فَأَدْلَىٰ دَلْوَهُۥ ۖ قَالَ يَـٰبُشْرَىٰ هَـٰذَا غُلَـٰمٌ ۚ وَأَسَرُّوهُ بِضَـٰعَةً ۚ وَٱللَّهُ عَلِيمٌۢ بِمَا يَعْمَلُونَ

Wa jā'at sayyāratun fa arsalū wāridahum fa adlā dalwah(ū), qāla yā busyrā hāżā gulām(un), wa asarrūhu biḍā‘ah(tan), wallāhu ‘alīmum bimā ya‘malūn(a).

एक क़ाफ़िला आया। फिर उसने पनिहारा को भेजा। उसने अपना डोल ज्यों ही डाला तो पुकार उठा, "अरे! कितनी ख़ुशी की बात है। यह तो एक लड़का है।" उन्होंने उसे व्यापार का माल समझकर छुपा लिया। किन्तु जो कुछ वे कर रहे थे, अल्लाह तो उसे जानता ही था

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