सूरह यूसुफ

ٱذْهَبُوا۟ بِقَمِيصِى هَـٰذَا فَأَلْقُوهُ عَلَىٰ وَجْهِ أَبِى يَأْتِ بَصِيرًا وَأْتُونِى بِأَهْلِكُمْ أَجْمَعِينَ

Iżhabū biqamīṣī hāżā fa alqūhu ‘alā wajhi abī ya'ti baṣīrā(n), wa'tūnī bi'ahlikum ajma‘īn(a).

मेरा यह कुर्ता ले जाओ और इसे मेरे बाप के मुख पर डाल दो। उनकी नेत्र-ज्योति लौट आएगी, फिर अपने सब घरवालों को मेरे यहाँ ले आओ।"

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