सूरह यूसुफ

يُوسُفُ أَيُّهَا ٱلصِّدِّيقُ أَفْتِنَا فِى سَبْعِ بَقَرَٰتٍ سِمَانٍ يَأْكُلُهُنَّ سَبْعٌ عِجَافٌ وَسَبْعِ سُنۢبُلَـٰتٍ خُضْرٍ وَأُخَرَ يَابِسَـٰتٍ لَّعَلِّىٓ أَرْجِعُ إِلَى ٱلنَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَعْلَمُونَ

Yūsufu ayyuhaṣ-ṣiddīqu aftinā fī sab‘i baqarātin simāniy ya'kuluhunna sab‘un ‘ijāfuw wa sab‘i sumbulātin khuḍriw wa ukhara yābisāt(in), la‘allī arji‘u ilan-nāsi la‘allahum ya‘lamūn(a).

"यूसुफ़, ऐ सत्यवान! हमें इसका अर्थ बता कि सात मोटी गायें है, जिन्हें सात दुबली गायें खा रही है और सात हरी बालें है और दूसरी (सात) सूखी, ताकि मैं लोगों के पास लौटकर जाऊँ कि वे जान लें।"

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