सूरह यूसुफ

ٱرْجِعُوٓا۟ إِلَىٰٓ أَبِيكُمْ فَقُولُوا۟ يَـٰٓأَبَانَآ إِنَّ ٱبْنَكَ سَرَقَ وَمَا شَهِدْنَآ إِلَّا بِمَا عَلِمْنَا وَمَا كُنَّا لِلْغَيْبِ حَـٰفِظِينَ

Irji‘ū ilā abīkum fa qūlū yā abānā innabnaka saraq(a), wa mā syahidnā illā bimā ‘alimnā wa mā kunnā lil-gaibi ḥāfiẓīn(a).

तुम अपने बाप के पास लौटकर जाओ और कहो, "ऐ हमारे बाप! आपके बेटे ने चोरी की है। हमने तो वही कहा जो हमें मालूम हो सका, परोक्ष तो हमारी दृष्टि में था नहीं

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