सूरह यूसुफ

وَقَالَ ٱلْمَلِكُ إِنِّىٓ أَرَىٰ سَبْعَ بَقَرَٰتٍ سِمَانٍ يَأْكُلُهُنَّ سَبْعٌ عِجَافٌ وَسَبْعَ سُنۢبُلَـٰتٍ خُضْرٍ وَأُخَرَ يَابِسَـٰتٍ ۖ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْمَلَأُ أَفْتُونِى فِى رُءْيَـٰىَ إِن كُنتُمْ لِلرُّءْيَا تَعْبُرُونَ

Wa qālal-maliku innī arā sab‘a baqarātin simāniy ya'kuluhunna sab‘un ‘ijāfuw wa sab‘a sumbulātin khuḍriw wa ukhara yābisāt(in), yā ayyuhal-mala'u aftūnī fī ru'yāya in kuntum lir-ru'yā ta‘burūn(a).

फिर ऐसा हुआ कि सम्राट ने कहा, "मैं एक स्वप्न देखा कि सात मोटी गायों को सात दुबली गायें खा रही है और सात बालें हरी है और दूसरी (सात सूखी) । ऐ सरदारों! यदि तुम स्वप्न का अर्थ बताते हो, तो मुझे मेरे इस स्वप्न के सम्बन्ध में बताओ।"

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