सूरह यूसुफ

وَشَرَوْهُ بِثَمَنٍۭ بَخْسٍ دَرَٰهِمَ مَعْدُودَةٍ وَكَانُوا۟ فِيهِ مِنَ ٱلزَّٰهِدِينَ

Wa syarauhu biṡamanim bakhsin darāhima ma‘dūdah(tin), wa kānū fīhi minaz-zāhidīn(a).

उन्होंने उसे सस्ते दाम, गिनती के कुछ दिरहमों में बेच दिया, क्योंकि वे उसके मामलें में बेपरवाह थे

📝 टिप्पणी
367) उन्हें डर था कि कहीं पैगंबर यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के परिवार वाले उन्हें ढूंढ न लें, जिससे वे उन्हें तुरंत वापस ले लेंगे और इनके हाथ कुछ नहीं लगेगा। इसलिए, उन्होंने जल्दबाजी में उन्हें बेच दिया, चाहे वह बहुत कम कीमत (ओने-पौने दाम) पर ही क्यों न हो।

सभी आयत 111 आयत
आज ही पढ़ना शुरू करें

क़ुरआन पढ़ना अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। क़ुरआन टुडे आपको विकर्षणों के बिना पढ़ना जारी रखने में मदद करता है, एक सरल, तेज़, निजी और आरामदायक अनुभव के साथ।