सूरह यूसुफ

وَمَا تَسْـَٔلُهُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۚ إِنْ هُوَ إِلَّا ذِكْرٌ لِّلْعَـٰلَمِينَ

Wa mā tas'aluhum ‘alaihi min ajr(in), in huwa illā żikrul lil-‘ālamīn(a).

तुम उनसे इसका कोई बदला भी नहीं माँगते। यह तो सारे संसार के लिए बस एक अनुस्मरण है

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