सूरह यूसुफ

قَالُوا۟ جَزَٰٓؤُهُۥ مَن وُجِدَ فِى رَحْلِهِۦ فَهُوَ جَزَٰٓؤُهُۥ ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلظَّـٰلِمِينَ

Qālū jazā'uhū maw wujida fī raḥlihī fa huwa jazā'uh(ū), każālika najziẓ-ẓālimīn(a).

वे बोले, "उसका दंड यह है कि जिसके सामान में वह मिले वही उसका बदला ठहराया जाए। हम अत्याचारियों को ऐसा ही दंड देते है।"

📝 टिप्पणी
361) पैगंबर याकूब (अलैहिस्सलाम) के कानून (शरिया) में चोर की सजा यह थी कि उसे एक वर्ष के लिए दास (ग़ुलाम) बना लिया जाता था।

सभी आयत 111 आयत
आज ही पढ़ना शुरू करें

क़ुरआन पढ़ना अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। क़ुरआन टुडे आपको विकर्षणों के बिना पढ़ना जारी रखने में मदद करता है, एक सरल, तेज़, निजी और आरामदायक अनुभव के साथ।